हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि गायों के दूध में बर्ड फ्लू वायरस (H5N1) की उपस्थिति से गंभीर संक्रमण के मामलों में वर्तमान एंटीवायरल दवाओं की प्रभावशीलता कम हो सकती है। यह खोज स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि H5N1 वायरस आमतौर पर पक्षियों में पाया जाता है, लेकिन अब यह स्तनधारी प्राणियों, विशेषकर डेयरी गायों में भी पाया गया है।
अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने गायों के कच्चे दूध में H5N1 वायरस के अंश पाए हैं। हालांकि, पाश्चराइजेशन प्रक्रिया के दौरान दूध को गर्म किया जाता है, जिससे अधिकांश बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं, इसलिए बाजार में उपलब्ध पाश्चराइज्ड दूध का सेवन सुरक्षित माना जा रहा है। इसके बावजूद, FDA ने कच्चा दूध पीने से बचने की सलाह दी है, क्योंकि इसमें वायरस की उपस्थिति का खतरा बना रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि H5N1 वायरस में तेजी से म्यूटेशन हो रहा है, जिससे यह अन्य प्रजातियों में भी फैल रहा है। पिछले तीन वर्षों में, पांच महाद्वीपों के 108 देशों में इसके संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे 500 से अधिक पक्षी प्रजातियां और कम से कम 70 स्तनधारी प्रजातियां प्रभावित हुई हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि बर्ड फ्लू के खतरे से बचने के लिए हमें पक्षियों और जानवरों के साथ सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। इसके अलावा, कच्चे या अधपके मांस और अंडे का सेवन न करें, क्योंकि इनमें वायरस की उपस्थिति हो सकती है। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और किसी भी संदिग्ध लक्षण के प्रकट होने पर तुरंत चिकित्सा सलाह लें।
यह महत्वपूर्ण है कि सरकारें और स्वास्थ्य संगठन इस नए खतरे के प्रति सतर्क रहें और आवश्यक कदम उठाएं ताकि बर्ड फ्लू के प्रसार को रोका जा सके और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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