TB prevention therapy

24 मार्च को दुनिया भर में विश्व क्षय रोग दिवस (World Tuberculosis Day) मनाया जाता है। इस अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी जारी की है। WHO के मुताबिक TB उन्मूलन के लिए फंडिंग में कटौती से इस बीमारी के खिलाफ जारी प्रयासों को बड़ा नुकसान हो रहा है।

WHO ने बिना किसी देश का नाम लिए “वैश्विक स्वास्थ्य वित्त पोषण में हो रही अचानक और भारी कटौती” का उल्लेख किया। लेकिन इशारा अमेरिका की ओर हीं है जिसने फंडिंग मे कटौती कर दुनिया की एक बड़ी आबादी को खतरे में डाल दिया है।
संगठन के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में वैश्विक स्वास्थ्य पहलों के चलते अनुमानित 7.9 करोड़ लोगों की जान बचाई गई है, लेकिन अब इन वित्तीय कटौतियों के कारण इन उपलब्धियों पर खतरा मंडरा रहा है।

क्षय रोग: दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारी

क्षय रोग (टीबी) दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक है, जिससे हर साल 10 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु होती है। यह न केवल स्वयं जानलेवा है, बल्कि अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को भी बढ़ा देता है, जैसे एचआईवी संक्रमित मरीजों की जल्द मृत्यु और एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि।

अमेरिकी फंडिंग कटौती से क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम प्रभावित

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में विदेशी सहायता में भारी कटौती की गई थी, जिससे अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी (USAID) द्वारा वित्त पोषित कई देशों के स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावित हुए। इसमें एचआईवी, मलेरिया और क्षय रोग से जुड़े कार्यक्रमों को भी बड़ा झटका लगा।

USAID की अधिकांश फंडिंग सब-सहारा अफ्रीका, एशिया और यूरोप में खर्च की जाती है। इसके अलावा, अमेरिका के WHO से बाहर होने की योजना के कारण संगठन अपने सबसे बड़े वित्तीय स्रोत को खोने की कगार पर है। WHO के अनुसार, टीबी की रोकथाम और देखभाल के लिए अकेले $22 बिलियन (लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये) की वार्षिक आवश्यकता है।

फ्रीका और एशिया में सबसे अधिक प्रभाव

WHO ने बताया कि उसकी अफ्रीकी सदस्य क्षेत्र के देशों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है, इसके बाद दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के देश प्रभावित हुए हैं।

वित्तीय संकट के कारण इन क्षेत्रों में कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं:

स्वास्थ्यकर्मियों की कमी

टीबी की जांच सेवाओं में बाधा

डेटा निगरानी प्रणाली की कमजोरी

टीबी मरीजों की पहचान और संपर्क ट्रेसिंग में दिक्कतें

WHO ने यह भी बताया कि यूरोप में दवा प्रतिरोधकता बढ़ रही है और कई प्रभावित क्षेत्रों में जारी संघर्ष टीबी के खिलाफ लड़ाई को और मुश्किल बना रहा है।

टीबी की दवाओं और वैक्सीन की आपूर्ति पर संकट

WHO के अनुसार, नौ देशों ने उन्हें बताया है कि उनके पास क्षय रोग की दवाओं की खरीद और आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर समस्या आ रही है। WHO फिलहाल टीबी के इलाज के लिए छह महीने के एंटीबायोटिक कोर्स की सिफारिश करता है और बीसीजी (BCG) वैक्सीन एकमात्र लाइसेंस प्राप्त टीबी रोकथाम टीका है।

नई वैक्सीन पर शोध, लेकिन वित्तीय संकट बना चुनौती

टीबी वैक्सीन के विकास में तेजी लाने के लिए “टीबी वैक्सीन एक्सीलरेटर काउंसिल” की स्थापना की गई है, लेकिन WHO ने कहा कि यदि त्वरित वित्तीय सहायता नहीं मिली तो यह पहल भी प्रभावित हो सकती है।

WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने कहा,
“पिछले 20 वर्षों में टीबी के खिलाफ जो प्रगति हुई है, वह अब खतरे में पड़ गई है क्योंकि वित्तीय कटौतियों के चलते रोकथाम, जांच और उपचार सेवाएं बाधित हो रही हैं। WHO सभी दाताओं, साझेदारों और प्रभावित देशों के साथ मिलकर इस प्रभाव को कम करने और नवाचारपूर्ण समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है।”

अन्य संक्रामक बीमारियों पर भी असर

USAID फंडिंग कटौती के असर अन्य बीमारियों पर भी पड़ रहे हैं। कांगो (DRC) ने हाल ही में बताया कि अमेरिकी वित्तीय कटौती के कारण मंकीपॉक्स (mpox) की लैब जांच में दिक्कत आ रही है। इसी सप्ताह, WHO ने कहा कि आठ देश जल्द ही एचआईवी के लिए जरूरी जीवन रक्षक दवाओं की कमी का सामना कर सकते हैं।

विश्व क्षय रोग दिवस पर WHO की यह चेतावनी बताती है कि यदि वित्त पोषण संकट जारी रहा, तो क्षय रोग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को बड़ा झटका लग सकता है। यह बीमारी पहले से ही लाखों लोगों की जान ले रही है और अगर आवश्यक वित्तीय सहायता नहीं मिली, तो यह संकट और गहरा सकता है। WHO ने सरकारों और दानदाताओं से तत्काल कदम उठाने की अपील की है ताकि इस घातक बीमारी पर काबू पाया जा सके।

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