एक हालिया अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि बिस्तर में स्क्रीन का उपयोग करने से अनिद्रा (Insomnia) का खतरा 59% तक बढ़ सकता है और नींद की अवधि में औसतन 24 मिनट की कमी हो सकती है। इस शोध में 45,202 युवा वयस्कों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि बिस्तर पर मोबाइल, लैपटॉप या अन्य स्क्रीन डिवाइस का इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अनिद्रा: बढ़ती चिंता का विषय
अनिद्रा एक आम नींद विकार है जिसमें व्यक्ति को सोने में कठिनाई होती है, बार-बार नींद टूटती है, या समय से पहले जाग जाने की समस्या होती है। यह केवल थकान ही नहीं बढ़ाता, बल्कि तनाव, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, क्रोनिक अनिद्रा (Chronic Insomnia) के कारण हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इस अध्ययन में स्पष्ट हुआ कि जो लोग रात को सोने से पहले स्क्रीन का उपयोग करते हैं, वे अधिकतर अनिद्रा के शिकार होते हैं और उनकी नींद की गुणवत्ता बेहद खराब होती है।
स्क्रीन टाइम और अनिद्रा का संबंध
विशेषज्ञों का कहना है कि नीली रोशनी (Blue Light), जो कि स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट और टेलीविजन से निकलती है, मस्तिष्क में मेलाटोनिन (Melatonin) हार्मोन के उत्पादन को बाधित कर सकती है। मेलाटोनिन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है जो हमारे सर्कैडियन रिदम (Circadian Rhythm) को नियंत्रित करता है और शरीर को नींद के लिए तैयार करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार,
चाहे वह लैपटॉप हो, मोबाइल, टीवी या किंडल, ये उपकरण आपको जागृत रखते हैं और सोने में बाधा डालते हैं। इनसे निकलने वाली नीली रोशनी रेटिना पर प्रभाव डालती है और मस्तिष्क को जाग्रत रखती है, जिससे नींद में देरी होती है और शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock) बाधित हो जाती है।
इसके अलावा, स्क्रीन पर दिखाई देने वाली सामग्री, जैसे सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो गेम, या ईमेल, मस्तिष्क को उत्तेजित करते हैं और व्यक्ति की रिलैक्स करने की क्षमता को कम कर देते हैं।
बेहतर नींद के लिए जरूरी नींद स्वच्छता (Sleep Hygiene)
नींद विशेषज्ञों का सुझाव है कि बेहतर नींद की आदतें अपनाने से स्क्रीन से होने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। नींद स्वच्छता (Sleep Hygiene) में निम्नलिखित उपाय शामिल हैं:
- स्क्रीन फ्री बेडरूम: सोने से कम से कम 30-60 मिनट पहले सभी स्क्रीन बंद कर दें।
- मेलाटोनिन का स्तर बनाए रखें: नीली रोशनी से बचने के लिए नाइट मोड (Night Mode) या ब्लू लाइट फिल्टर (Blue Light Filter) का उपयोग करें।
- नियमित सोने और जागने की दिनचर्या: हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें।
- आरामदायक वातावरण: सोने के लिए अंधेरा, शांत और ठंडा वातावरण बनाएं।
- कैफीन और भारी भोजन से बचें: सोने से पहले कैफीन, शराब या भारी भोजन का सेवन न करें।
- रिलैक्सिंग एक्टिविटी करें: सोने से पहले किताब पढ़ना, मेडिटेशन करना या हल्का संगीत सुनना बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से अनिद्रा और अन्य नींद संबंधी विकारों का खतरा बढ़ जाता है। नींद की स्वच्छता बनाए रखने और सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाकर हम अपनी नींद की गुणवत्ता सुधार सकते हैं और मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।
अगर आप भी रात में ठीक से सो नहीं पा रहे हैं, तो अपनी स्क्रीन टाइम आदतों पर दोबारा विचार करें और नींद स्वच्छता को प्राथमिकता दें।
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