नेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (एनबीई) द्वारा नीट पीजी परीक्षा को दो शिफ्टों में आयोजित करने के फैसले को लेकर देशभर के डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। डॉक्टर एसोसिएशन FAIMA के साथ-साथ देशभर के मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि परीक्षा एक ही शिफ्ट में होनी चाहिए ताकि निष्पक्षता बनी रहे और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या धांधली की संभावना न रहे।
FAIMA ने उठाए गंभीर सवाल
ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) के संस्थापक डॉ. रोहन कृष्णन ने दो शिफ्टों में परीक्षा कराने के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे कदाचार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा को एक ही दिन और एक ही शिफ्ट में आयोजित किया जाना चाहिए ताकि सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके।
डॉ. रोहन ने यह भी कहा कि इस परीक्षा के लिए उम्मीदवारों से 3500 रुपये शुल्क लिया गया है, बावजूद इसके परीक्षा को दो अलग-अलग शिफ्टों में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि इससे परीक्षा की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। इस मुद्दे को उठाते हुए डॉ. कृष्णन ने ट्वीट के जरिए भी अपनी चिंता जाहिर की है।
https://x.com/DrRohanKrishna3/status/1901651251584233934?t=QXN8wrHPT-TMvj-vTMhysQ&s=19
गड़बड़ी की संभावना और सुप्रीम कोर्ट का रुख
नीट पीजी परीक्षा को दो शिफ्टों में कराने का विरोध इसलिए भी हो रहा है क्योंकि इससे परीक्षा के प्रश्नपत्र अलग-अलग होंगे, जिससे कठिनाई स्तर में अंतर आ सकता है। इस कारण से परीक्षा सिर्फ एक ही पाली में कराई जानी चाहिए। डॉ. रोहन ने बताया कि पहले ही सामान्यीकरण (Normalization) प्रक्रिया को लेकर छात्र असंतुष्ट थे, और अब दो शिफ्टों में परीक्षा आयोजित करने से और अधिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इस मुद्दे पर परीक्षा के इच्छुक उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में राज्य कोटे और राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा को सुचारु रूप से संचालित करने की बात कही थी।
तमिलनाडु रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (TNRDA) का आधिकारिक बयान
तमिलनाडु रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (TNRDA) ने भी इस मुद्दे पर कड़ा विरोध जताते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है। एसोसिएशन ने दो शिफ्टों में परीक्षा कराने और अंकों के सामान्यीकरण (Normalization) को लागू करने की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है।
TNRDA के महासचिव ने कहा:
“Normalization कोई समाधान नहीं है, बल्कि यह एक समस्या को छिपाने का प्रयास है। दो अलग-अलग शिफ्टों की कठिनाई समान नहीं हो सकती। कोई भी सांख्यिकीय फॉर्मूला—चाहे वह Z-स्कोर, परसेंटाइल या अन्य मॉडल हो—प्रश्नपत्रों की कठिनाई के अंतर को पूरी तरह संतुलित नहीं कर सकता। इससे वास्तविक मेधावी छात्रों की मेहनत पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि AIIMS, INI-CET और NEET UG जैसी परीक्षाएं एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाती हैं, तो फिर NEET PG को अलग तरीके से क्यों संचालित किया जा रहा है?
उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा:
“NBE ने कभी भी स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि Normalization प्रक्रिया कैसे की जाती है। इस प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता होनी चाहिए, अन्यथा यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा होगा।”
डॉक्टरों और छात्रों ने की पुनर्विचार की मांग
डॉक्टर एसोसिएशन और उम्मीदवारों का कहना है कि अगर परीक्षा दो शिफ्टों में कराई जाती है, तो इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे। तमिलनाडु RDA सहित कई अन्य डॉक्टर संगठनों ने NBE से अपील की है कि परीक्षा को एक ही शिफ्ट में आयोजित किया जाए और पारदर्शिता बनाए रखी जाए।
अब देखना यह होगा कि NBE इस विरोध को देखते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करता है या नहीं।
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