वायु प्रदूषण आज मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, हवा में मौजूद PM 2.5 (फाइन पार्टिकुलेट मैटर) शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर स्ट्रोक, डायबिटीज, हृदय रोग, फेफड़ों का कैंसर और श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों का कारण बन रहा है।
WHO के मुताबिक, 2019 में दुनियाभर में 42 लाख लोगों की मौत समय से पहले हो गई थी, जिसका मुख्य कारण शहरी और ग्रामीण इलाकों में बढ़ता वायु प्रदूषण था। इनमें हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), एक्यूट लोअर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन और फेफड़ों का कैंसर प्रमुख कारण थे।
वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों का चौंकाने वाला आंकड़ा
WHO के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण होने वाली कुल मौतों में से:
✅ 36% लंग कैंसर से होती हैं, क्योंकि PM 2.5 फेफड़ों को पूरी तरह डैमेज कर देता है।
✅ 34% स्ट्रोक की वजह से होती हैं, जिसमें दिमाग की नसें फट जाती हैं।
✅ 27% हार्ट डिजीज के कारण होती हैं, जो हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।
PM 2.5: हवा में घुला धीमा जहर
PM 2.5 बेहद सूक्ष्म कण होते हैं जो हमारे फेफड़ों और रक्तप्रवाह में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण अंगों को भारी नुकसान होता है।
- मस्तिष्क (Brain): स्ट्रोक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियां
PM 2.5 दिमाग की नसों में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा कर ब्रेन स्ट्रोक, अल्जाइमर और डिमेंशिया का खतरा बढ़ाता है।
- हृदय (Heart): दिल की बीमारियों का बढ़ता खतरा
प्रदूषण के कारण हाई ब्लड प्रेशर, अतालता (Arrhythmia) और दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
- फेफड़े (Lungs): कैंसर और सांस की गंभीर बीमारियां
फेफड़ों में जमा होने वाले प्रदूषक तत्व क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), अस्थमा और लंग कैंसर का मुख्य कारण बन रहे हैं।
- डायबिटीज और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर
शोध में पाया गया है कि PM 2.5 इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाकर टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है।
कैसे बचा जा सकता है?
✔ मास्क पहनें और घर से बाहर निकलते समय AQI (Air Quality Index) चेक करें।
✔ घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और अधिक पौधे लगाएं।
✔ वाहनों और औद्योगिक प्रदूषण को कम करने के लिए सख्त कानून लागू किए जाएं।
✔ सार्वजनिक परिवहन और साइकिलिंग को बढ़ावा दिया जाए ताकि प्रदूषण कम हो।
निष्कर्ष
वायु प्रदूषण से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को अपूरणीय क्षति हो रही है। WHO के आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि यदि इस संकट को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो भविष्य में यह और भी भयावह रूप ले सकता है। सरकार, समाज और हर नागरिक को इस समस्या के समाधान के लिए आगे आना होगा, ताकि हम और आने वाली पीढ़ियां एक स्वस्थ जीवन जी सकें।
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