Oral Health Crisis

भारत में ओरल हेल्थ एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 85% वयस्क दांतों की सड़न, मसूड़ों की बीमारियों और मुख कैंसर जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। यह समस्या केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन गई है, जिससे लाखों लोगों की जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

मुख्य कारण और उनके प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, ओरल हेल्थ समस्याओं के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिनमें शामिल हैं:

  1. अनुचित ओरल स्वच्छता: बहुत से लोग नियमित रूप से ब्रश और फ्लॉस नहीं करते हैं, जिससे दांतों में प्लाक और बैक्टीरिया का निर्माण होता है, जो दांतों की सड़न और मसूड़ों की बीमारियों का प्रमुख कारण बनता है।
  2. असंतुलित आहार: अत्यधिक चीनी और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन दांतों की सड़न को बढ़ावा देता है। मीठे पेय, जंक फूड और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स दांतों के इनेमल को कमजोर कर सकते हैं।
  3. तंबाकू और शराब का सेवन: धूम्रपान और तंबाकू चबाने से मसूड़ों की बीमारी, दांतों के झड़ने और मुख कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अत्यधिक शराब का सेवन भी मुख कैंसर के खतरे को बढ़ाता है।
  4. नियमित दंत चिकित्सा जांच की कमी: बहुत से लोग तब तक दंत चिकित्सक के पास नहीं जाते जब तक समस्या गंभीर न हो जाए। समय पर दंत परीक्षण न करवाने से छोटी समस्याएँ बढ़कर बड़ी बीमारियों का रूप ले लेती हैं।
  5. स्वच्छ पेयजल और पोषण की कमी: ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल की अनुपलब्धता और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी भी दंत स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।

समस्याओं के गंभीर परिणाम

मौखिक स्वास्थ्य की उपेक्षा से कई गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं:

दांतों की सड़न और दर्द: लंबे समय तक अनदेखी करने से दांतों की सड़न इतनी बढ़ सकती है कि दांत निकालने की नौबत आ सकती है।

मसूड़ों की बीमारी (पेरियोडॉन्टल डिजीज): यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है, जिससे मसूड़ों में सूजन, खून आना और दांतों की जड़ें कमजोर होना शुरू हो जाती हैं।

मुख कैंसर: तंबाकू और शराब के अत्यधिक सेवन से भारत में मुख कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। शुरुआती चरण में इसे नजरअंदाज करने से घातक परिणाम हो सकते हैं।

ओरल हेल्थ का दिल की बीमारियों से संबंध:

शोध से पता चला है कि खराब मौखिक स्वास्थ्य हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा सकता है, क्योंकि मसूड़ों की बीमारी से शरीर में सूजन और संक्रमण का खतरा बढ़ता है।

मौखिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए सुझाव

मौखिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और गंभीर समस्याओं से बचने के लिए निम्नलिखित सुझावों को अपनाया जा सकता है:

  1. नियमित दंत स्वच्छता अपनाएँ:

दिन में कम से कम दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें।

रोज़ाना फ्लॉस का उपयोग करें, जिससे दांतों के बीच जमी गंदगी दूर हो सके।

माउथवॉश का इस्तेमाल करें, जो बैक्टीरिया को मारने में मदद करता है।

  1. संतुलित आहार लें:

शक्कर युक्त खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों का सेवन सीमित करें।

हरी सब्जियाँ, फल, दूध और डेयरी उत्पादों का सेवन बढ़ाएँ।

भरपूर पानी पिएं, जिससे मुंह की सफाई बनी रहे और बैक्टीरिया कम हों।

  1. तंबाकू और शराब से परहेज करें:

धूम्रपान और तंबाकू चबाने की आदत को छोड़ें।

अत्यधिक शराब के सेवन से बचें, क्योंकि यह मुख कैंसर और अन्य मौखिक बीमारियों के प्रमुख कारणों में से एक है।

  1. नियमित दंत जांच करवाएँ:

हर छह महीने में दंत चिकित्सक से जांच करवाएं।

शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज न करें और समय पर इलाज करवाएँ।

  1. गंभीर मामलों में विशेषज्ञ से परामर्श लें:

यदि किसी को लगातार मसूड़ों से खून आना, मुंह में घाव रहना, या किसी प्रकार की सूजन हो रही है, तो तुरंत दंत चिकित्सक या ऑनकोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

भारत में मौखिक स्वास्थ्य की स्थिति चिंताजनक है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह न केवल दांतों और मसूड़ों की बीमारियों को रोकने में मदद करता है, बल्कि यह समग्र स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार लाता है। समय पर ध्यान देकर और उचित देखभाल अपनाकर, हम इन बढ़ती हुई समस्याओं से बच सकते हैं और एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। सरकार, स्वास्थ्य संस्थाएँ, और व्यक्तिगत स्तर पर सभी को मिलकर इस संकट से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।

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