Covishield Vaccine

एस्ट्राजेनेका ने वैक्सीन के रेयर साइड इफेक्ट को स्वीकार किया जिसे लेकर भारत में पैनिक फैल गया। लेकिन अब एक्सपर्ट का कहना है की पैनिक होने की जरूरत नहीं है।

एस्ट्राजेनेका ने अपने वैक्सीन से रेयर साइड इफेक्ट की पुष्टि की जिसके बाद भारत में भी करोड़ों लोग हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के बढ़ते मामलों को कोविशील्ड वैक्सीन से जोड़कर देखने लगे। भारत में एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोविशील्ड के नाम से हीं दी गई थी। पूरे रिपोर्ट के अध्ययन के बाद अब भारतीय हेल्थ एक्सपर्टस ने इस मामले का विश्लेषण किया है जिसके बाद खतरे की आशंका को निराधार बताया जा रहा है।

हेल्थ एक्सपर्ट का क्या कहना है?

जाने माने हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर अंशुमान कुमार का कहना है की कोविशील्ड वैक्सीन लेने के बाद TTS यानी थ्रोंबोसिस विद थ्रंबोसाइटोपेनिया के चांसेज तो होते हैं लेकिन इसकी संभावना 4 से 42 दिन के अंदर हीं हो सकती है । TTS में चुकी ब्लड क्लॉटिंग होता है लिहाजा प्लेटलेट्स कम हो सकती है जिसका जिक्र कंपनी के ताजा बयान में भी है। एक्सपर्टस की माने तो इसको लेकर पैनिक की कोई वजह नहीं और हार्ट अटैक को लेकर फैला अफवाह वैज्ञानिक तौर पर निराधार है ।


हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है की एस्ट्राजेनेका की रिपोर्ट में TTS ब्रेन, लंग्स, इंटेस्टाइन और लेग में होने का जिक्र किया गया है लेकिन इस रिपोर्ट में कहीं ये जिक्र नहीं है की इससे हार्ट अटैक हुआ है। जो केस वैक्सीन को लेकर दर्ज है उन्हे भी देखे तो इसमें सबसे घातक ब्रेन स्ट्रोक का है और वह भी वैक्सीन लेने के एक निश्चित अवधि के भीतर का साइड इफेक्ट है, न की कोई ताजा मामला है।

Delhi Medical Council के President Dr Arun Gupta का कहना है कि पेरासिटामोल जैसी आसानी से मिलने वाली दवा सहित सभी टीकों और दवाओं के दुष्प्रभाव होते हैं। सभी में मृत्यु सहित दुर्लभ गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। यह हमेशा लाभ बनाम जोखिम के बारे में है। यदि किसी भी चीज में फायदा अगर जोखिम से अधिक हो तो उत्पाद का उपयोग किया जाता है। कृपया किसी दवा या वैक्सीन को बदनाम करने के लिए गलत और अवैज्ञानिक जानकारी न फैलाएं। यह राजनीति के बारे में नहीं है. कृपया विज्ञान में लोगों का विश्वास कम न करें।

जहां तक हार्ट हेल्थ का सवाल है तो विभिन्न रिपोर्ट में कोविड संक्रमण का असर हार्ट पर पाया गया है। स्टडी के मुताबिक कोविड संक्रमण के कारण ब्लड क्लॉट होता है और इसका असर हार्ट पर भी देखा गया है। अगर आईसीएमआर की रिपोर्ट को देखें तो उसमे भी स्टडी के आधार पर वैक्सीन से कार्डियक अरेस्ट को निराधार बताया गया है।

टीटीएस का कारण और खतरा
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक वैक्सीन की पहली डोज के 4 दिन से 42 दिन के भीतर TTS होने की बात स्वीकार की गई है । दरअसल जब वैक्सीन की पहली डोज दी जाती है तो इम्यून सिस्टम का टी सेल और बी सेल एक्टिव हो जाता है, ऐसे में इम्यून रिस्पॉन्स बढ़ जाता है । इससे खून की नली में सूजन की स्थिति बन जाती है। ब्लड क्लोटिंग की स्थिति में प्लेटलेट्स भी ज्यादा खर्च होते हैं जिससे शरीर में प्लेटलेट्स की कमी देखी जाती है। इसे ही मेडिकल टर्म में TTS कहा जाता है।

कोविड और हार्ट अटैक
हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर अंशुमान का कहना है की कोविड के दौरान हार्ट में क्लाॅट बन रहा था , साथ हीं मांसपेशियों में सूजन की वजह से हार्ट बीट पर भी प्रभाव देखा गया । इससे कई तरह के अन्य सिम्पटम और इफेक्ट का भी अध्ययन किया गया। जो हार्ट अटैक के मामले बढ़े उसके पीछे लॉक डाउन के कारण लोगों की सक्रियता में कमी और लाइफ स्टाइल डिजीज का बढ़ना भी एक फैक्टर के रूप के देखा गया। मेंटल स्ट्रेस, मोटापा, डायबिटीज जैसी स्थिति भी भारत में कोविड के दौरान और पोस्ट कोविड हार्ट हेल्थ के लिए एक बड़ा खतरा है। साथ हीं पॉल्यूशन सहित कई अन्य फैक्टर है जो हार्ट हेल्थ की सीधे प्रभावित करते है जिससे हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है।

कोविशील्ड को राजनीति का जरिया न बनाएं:एक्सपर्ट

जाने माने हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर सी ए फिलिप ने सोशल मीडिया में जारी इस बहस पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की। डॉक्टर फिलिप ने हेल्थ और साइंस जैसे विषय पर राजनीतीकरण करने वाले हैंडल्स को आड़े हाथों लिया। साथ ही सोशल साइट X पर अपने पोस्ट के जरिए वैक्सीन से हार्ट अटैक के अफवाह पर करारा प्रहार करते हुए कई प्रसिद्ध साइंस जर्नल का हवाला भी दिया। डॉक्टर फिलिप ने लिखा की साइड इफेक्ट का केस इतना रेयर है की 4 मिलियन में एक देखा गया जबकि कोविड से सीवयर इंफेक्टेड 100 लोगो में से 5 से 25 लोगों में क्लोटिंग के मामले देखे गए। यह साबित करता है की वैक्सीन से रिस्क कितना कम है जबकि कोविड से हो रहे इन्फेक्शन से कितना ज्यादा है। साथ ही ऐसा कोई मेडिकल प्रूफ नहीं है की वैक्सीन से कोई कार्डियक अरेस्ट हुआ।

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