Body Mass Index

मोटापा के संबंध में बॉडी मास इंडेक्स का सच क्या है? क्या BMI से मोटापा का सही मानक हैं ?

लम्बे समय से BMI यानी बॉडी मास इंडेक्स, दुनिया भर में सही वजन और मोटापे के निर्धारण के लिए प्रयोग में रहा है। किसी व्यक्ति का वजन हेल्दी है, ओवर वेट है या फिर वह ओबेसिटी यानी मोटापे का शिकार है इसका निर्धारण डॉक्टर उसके बॉडी मास इंडेक्स से करते हैं जिसमे वेट टू हाइट रेश्यो मायने रखता है।व्यक्ति का वजन किलोग्राम में और उसके हाईट को मीटर में नापकर डिवाइड किया जाता है। अगर बीएमआई 18.5 से कम है तो अंडरवेट, 18.5 और 24.9 के बीच हो तो नॉर्मल, 25 से 29.9 के बीच हो तो ओवरवेट, और 30 से ज्यादा हो तो ओबेस यानी व्यक्ति मोटापे की श्रेणी में आता है।


एक बहस लंबे समय से चल रही है की बीएमआई के इसी मानक पर मोटापे का निर्धारण क्यों किया जाए जबकि कंट्री, बाउंड्री और ज्योग्राफी का प्रभाव भी इंसान के शारीरिक संतुलन पर देखा जाता है। किसी व्यक्ति के पेट या कूल्हे पर चर्बी है और वह मोटापे का शिकार है, वही किसी स्पोर्ट्समैन या पहलवान के पेट और कूल्हे पर चर्बी नही है लेकिन उसके मसल अन्य बॉडी पार्ट पर ज्यादा है जो उसे मोटापे की श्रेणी में ला सकते हैं या नहीं भी ।

वर्तमान सदी में मोटापा एक वैश्विक महामारी ले चुका है और भारत में यह हाल के वर्षो में बेहद तेजी से फैला है जिसके कारण लाइफ स्टाइल डिजीज, डायबिटीज, हाइपरटेंशन और कैंसर के मरीजों में भारी इजाफा देखा गया है।कुछ एक्सपर्ट का मानना है की बीएमआई शरीर के फैट डिस्ट्रीब्यूशन का सही इवेलुएशन नहीं करता मसलन पेट की चर्बी और हांथ का मसल वजन के रूप में तो समान है और इसका बीएमआई इंडेक्स भी समान होगा लेकिन मेडिकल टर्म में इसका इवेल्यूएशन एक तरह से नहीं किया जा सकता।

यानी बीएमआई फिजिशियन को शरीर के अलग अलग अंगो पर फैट के जमाव का सही एंड रिजल्ट नहीं देता। एक सवाल और उठता है की डॉक्टर का अपना इवेलुएशन जो वह व्यक्ति को देखकर खुद कर सकता है, बीएमआई उससे ज्यादा बेहतर कैसे है?इस मसले पर दुनिया भर में एक्सपर्ट का अलग अलग मत है लेकिन जो मिला जुला मत है उससे यही निष्कर्ष निकलता है की बीएमआई का इस्तेमाल बंद नहीं किया जा सकता। लेकिन इसके अलावा मोटापे का निर्धारण करने के लिए अन्य मैथड भी अपनाना चाहिए जैसे की स्किन फोल्ड कैलिपर्स इत्यादि।

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