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हाल ही में “News Medical” में प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि शाकाहारी आहार अपनाने वाले वृद्ध वयस्कों में स्वस्थ और सक्रिय वृद्धावस्था की संभावना कम हो सकती है, खासकर यदि उनका आहार आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर नहीं है। हालांकि, जिन व्यक्तियों का शाकाहारी आहार उच्च गुणवत्ता वाला था, उनमें यह नकारात्मक प्रभाव देखने को नहीं मिला।

यह अध्ययन चीन हेल्दी न्यूट्रिशन सर्वे (CHNS) के डेटा पर आधारित था, जिसमें विभिन्न प्रकार के आहार पैटर्न और उनके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया गया। अध्ययन के अनुसार, जिन व्यक्तियों का शाकाहारी आहार पौष्टिक और संतुलित नहीं था, उनमें मांसपेशियों की कमजोरी, हड्डियों के कमजोर होने, और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट देखी गई।

शाकाहारी आहार और पोषण संबंधी चुनौतियाँ

शाकाहारी आहार कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है, जैसे कि हृदय रोग, मधुमेह, और उच्च रक्तचाप का कम जोखिम। लेकिन, यदि यह संतुलित न हो, तो यह कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी का कारण बन सकता है, जो वृद्धावस्था में स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

  1. प्रोटीन की कमी

प्रोटीन शरीर के ऊतकों के पुनर्निर्माण और मांसपेशियों की मजबूती के लिए आवश्यक है। शाकाहारी आहार में मुख्य रूप से दालें, सोया उत्पाद, नट्स और बीज होते हैं, लेकिन यदि इनका सेवन पर्याप्त मात्रा में न किया जाए, तो मांसपेशियों की कमजोरी और थकान हो सकती है।

  1. विटामिन B12 की कमी

विटामिन B12 मुख्य रूप से मांस, अंडे और डेयरी उत्पादों में पाया जाता है। यह तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने और रक्त निर्माण में सहायक होता है। इसकी कमी से थकान, कमजोरी और न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ हो सकती हैं।

  1. आयरन और कैल्शियम की कमी

शाकाहारी लोगों को आमतौर पर आयरन की कमी हो सकती है क्योंकि पौधों से मिलने वाला नॉन-हीम आयरन शरीर में आसानी से अवशोषित नहीं होता। हरी पत्तेदार सब्जियाँ, चुकंदर, अनार, और सूखे मेवे इस कमी को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं।

कैल्शियम की कमी हड्डियों को कमजोर बना सकती है और फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ा सकती है। दूध, दही, पनीर, तिल, और बादाम से कैल्शियम प्राप्त किया जा सकता है।

  1. ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी

ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय और मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं, जो मुख्य रूप से मछली और समुद्री खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं। शाकाहारी व्यक्ति अलसी, अखरोट और चिया सीड्स से ओमेगा-3 प्राप्त कर सकते हैं।

स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए शाकाहारी व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

शाकाहारी आहार को संतुलित और पौष्टिक बनाने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं:

  1. विविध आहार का सेवन करें

एक ही प्रकार के भोजन पर निर्भर न रहें। अपने आहार में दालें, अनाज, सब्जियाँ, फल, नट्स, और डेयरी उत्पादों को संतुलित रूप से शामिल करें।

  1. प्रोटीन के अच्छे स्रोत शामिल करें

सोया उत्पाद (टोफू, सोया दूध), पनीर, राजमा, छोले, मूंगफली और बीन्स का सेवन करें ताकि प्रोटीन की कमी न हो।

  1. विटामिन B12 की पूर्ति करें

यदि आहार में विटामिन B12 की मात्रा कम है, तो इसे फोर्टिफाइड अनाज, डेयरी उत्पादों या डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स के माध्यम से प्राप्त करें।

  1. आयरन के अवशोषण को बढ़ाएं

आयरन युक्त भोजन (हरी पत्तेदार सब्जियाँ, बीन्स, अनार) के साथ विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ (नींबू, संतरा, आंवला) लें, ताकि शरीर में आयरन का अवशोषण बेहतर हो।

  1. ड्डियों को मजबूत बनाएं

कैल्शियम और विटामिन D का सेवन बढ़ाएं। धूप में समय बिताएं और दूध, दही, पनीर, और तिल के बीज का सेवन करें।

  1. स्वस्थ वसा का सेवन करें

अखरोट, अलसी के बीज, चिया सीड्स और एवोकाडो को आहार में शामिल करें ताकि ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी न हो।

  1. नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं

बुजुर्ग शाकाहारी व्यक्तियों को नियमित रूप से हीमोग्लोबिन, विटामिन B12, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों के स्तर की जांच करानी चाहिए ताकि कोई कमी हो तो समय पर सुधार किया जा सके।

यह अध्ययन दर्शाता है कि शाकाहारी आहार अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन यदि इसे सही तरीके से नहीं अपनाया जाए, तो यह वृद्धावस्था में स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए, संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर शाकाहारी आहार अपनाना आवश्यक है।

शाकाहारी जीवनशैली को सफलतापूर्वक अपनाने के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को सही मात्रा में शामिल करना जरूरी है, ताकि वृद्धावस्था में भी शरीर स्वस्थ, सक्रिय और मजबूत बना रहे।

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