Army Hospital Research and Referral (AHRR)

भारतीय सेना ने त्वरित कार्रवाई कर एक ऐसे सैनिक को नया जीवन प्रदान किया जिसका हांथ और अंगूठा एक दुर्घटना में लाइन ऑफ ड्यूटी के दौरान लद्दाख की पहाड़ियों पर कट गया था। यह एक घातक सुरक्षा मिशन था जो भारतीय सेना की तत्परता, उनकी उन्नत चिकित्सा विशेषज्ञता, और समर्थन सेवाओं  को दिखाता है, जो हर सैनिक के कल्याण के मूल्यों को उच्चतम स्तर पर रखता है।

घटना 9 अप्रैल 2024 की है। लद्दाख के चुनौतीपूर्ण इलाके में तैनात एक सैनिक  गंभीर रूप से घायल हो जाता है और उसका एक हाथ कट जाता है।

इस सैनिक के बचाव में सेना एक ऑपरेशन को त्वरित रूप से अंजाम देती है जिसमे रात के पहर वायु सेना की मदद ली गई। वायु सेना के ट्रांसपोर्ट विमान को रात के पहर सफलता पूर्वक लैंडिंग कराकर

सैनिक को शीघ्रता से लेह लाया गया।  सैन्य गैरिसन अस्पताल में  डॉक्टरों की टीम ने घायल सैनिक को स्थिर किया। लेकिन स्पेशलाइज्ड टीम के अभाव में उसे फिर दिल्ली भेजने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने एक निर्णय लिया कि सैनिक को उसके अंगों को बचाने के लिए उन्नत चिकित्सा देने के लिए  दिल्ली के आर्मी अस्पताल रिसर्च और रेफरल (एएचआरआर) में ले जाया जाए।

दिल्ली में, सैनिक को तत्काल पालम तकनीकी क्षेत्र से चिकित्सा पर्यवेक्षण के अधीन एएचआरआर आर्मी हॉस्पिटल लाया गया जहा डॉक्टरों की टीम ने सफल ऑपरेशन कर सैनिक के कटे हांथ को जोड़ दिया।

इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम देने में मेडिकल टीम को  9 घंटे सर्जरी करनी पड़ी, जिसमें उसका कटा हुआ अंगूठा फिर से जुड़ गया और हांथ के पंजे को पुनर्स्थापित किया गया।

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